मनहुस

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एक गाँव में एक लड़की थी ,वो काली थी उसके दाँत बहार को निकले थे। और जब वो हंसती तो हो हो कर के हसने लगती। उसके रंग और उसकी आदतों को देख कर उसके घर वाले और गॉँव वाले उसे मनहुस – मनहुस केह कर बुलाते थे। जब कभि भी वो अपने पापा के सामने हँसती तो वो उसे तुरंत मरने लगता और बोलता –
रे मनहूस तू पैदा होते ही को न मर गई। कब तक मेरे छाती पे मूंग पिसती रहेगी।
तेरी सकल और हरकत देख कोई तोसे व्याह न रचाये गा। मर क्यों न जाती तू करम जाली।
वो ये सब सुन कर भी हंसती रहती और जेक अपने माँ के पास बैठ जाती।
पूरी दुनियाँ मे बस वो हितो थी जो उसे प्यार करती थी। आज तक उसकी माँ ने उसे कभी नहीं डाटा।
लड़की के सकल सूरत मे लाख बुराई सही ,लेकिन भगवन ने उसे आवाज का तोफा दिया था।
उसकी आवाज मे मानो माँ सरस्वती जी का वास हो ,जब वो गाती थी ,तो वहाँ से गुजने वालो के कदम रुक जाते थे।
कुछ भी कहो सरे गॉँव में उसके आवाज के चरचे थे। कही भी जागरण हो या कही रामायण पाठ हो लोग उसे बुलाने जरूर आते थे।
ऐ मनहूस आज आजाना माता की चौकी है। वो ये सब सुन कर भी हँस देती थी।
जब बहुत दुःखी होती तो जाके अपनी माँ की गोद मे सर रख कर सो जाती। और माँ भी उसके सर पे हाथ फेरती रहती।
एक बार उसे देखने के लिए लड़के वाले आये।
सब उसे खोज रहे थे ,लेकिन वो दिख नहीं रही थी। घर वालो ने उसे बहुत खोजा लेकिन वो नहीं मिली.
आखिर वो शाम को जब घर आई तो उसके हाथ मई एक सटिफिकेट था। वो खुशी -खुशी घर मे घुसी। वैसे ही उसके पिताजी ने उसे मरना सुरु कर दिया और बहुत मारा और बोला।
अरे कर्मजली कहाँ मर गई थी। कहा थी तू ,काश मर ही जाती तू ,हमारी नाक कटा दिया है तूने। जा जाके नदी मे डूब मर।
मर खा के वो सीधे अपनी माँ के पास गई और जैसे ही उसने अपना सर उसकी गोद मे रखा उसने भी उसे झिड़कते हुए बोली।
कहाँ मर गई थी ,काश तू मेरी कोख मे ही मर जाती तो आज ये दिन देखने नहीं पड़ते।
उसने बोला माँ तुम बोल रही हो ,मैं मर जाऊ।
हाँ मै ही बोल रही हु तू मर जा।
माँ तू सच मे चाहती है मै मर जाऊ ?
हाँ मनहूस मैं सच मे चाहती हूँ ,तू मर जाये और मेरी जान छोड़े।
आज पहली बार अपनी माँ से डाट खा कर वो खूब जोर से रोइ और अपने कमरे मे जाकर दरवाजा बन्द कर लिया।
जब उसकी माँ को अपनी गलती का एहसास हुआ तब वो उसके कमरे की तरफ गई और दरवाजा खटखटा के बोलने लगी –
बेटी मुझे माफ़ कर दे मैं गुसे में तुझे कुछ ज्यादा बोल दिया। अब मान जा दरवाजा खोल दे।
लेकिन दरवाजा नहीं खुला।
अब वो चिल्लाने लगी उसकी आवाज सुन कर लोग वहाँ इकटा हो गए और मिल कर दरवाजा तोड़ दिया।
अन्दर जाके देखा तो उस लड़की ने अपने दुपटे के सहारे पंखे मे खुद को फांसी लगा दी थी ,उसकी जुबान बाहर लटकी हुई थी।
पास के टेबल पर उसका सटिफिकेट एक चेक और एक लेटर था ,जिसमे लिखा था।
माँ मैं आज एक मुसिक कॉम्पिटिशन मे गई थी।
वहाँ पर जब जज ने मेरा गाना सुना तो बोला कितनी भागयशाली लड़की है ये ,
इसके गले मे तो सक्छात माँ सरस्वती का वास है ,
कितने महान हैं इसके माता -पिता जिनके घर भागयशाली लड़की का जन्म हुआ है।
कितनी महान है ,उस गाँव की मिट्टी जहाँ से ऐसी सिंगर आई है.
उन्होंने मुझे आपनी नई अलबम के लिए साइन कर लिया और मुझे एडवांस में २ लाख का चेक भी दिया।
मैं यही बताने आई थी।
माँ तुमने मुझे आज तक नहीं डाटा ,अब जब तुम ही मुझसे रूठ गई हो तो मैं जी के क्या करूगी।
माँ मै बहुत मनहुस हूँ ना .
मैं इतनी बदसूरत हुँ ,इसमे मेरी क्या गलती है माँ।
तुम रोना नहीं माँ ,आज के बाद तुम्हे कोई मनहूस की माँ नहीं कहेगा।

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