जानिए लम्बी उम्र जीने के बावजूद कृष्ण हमेशा जवान कैसे दिखते थे –

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कलारिपट्टू विद्या में पारंगत थे कृष्ण…
लम्बी उम्र जीने के बावजूद कृष्ण हमेशा जवान दिखते थे।अंतिम समय तक न उनके बाल सफ़ेद हुए और ना ही उनकी त्वचा में कहीं झुर्रियाँ पड़ीं।119 वर्ष की उम्र में भी वह युवा ही थे।उनके सदैव आकर्षक दिखने और बलशाली रहने के पीछे क्या रहस्य था कोई नहीं समझ पाया आजतक।माना यह भी जाता है कि कृष्ण की देह लड़कियों के समान कोमल और मृदुल थी लेकिन युद्ध के समय उनकी देह विस्तृत और कठोर हो जाती थी।जनश्रुति के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ऐसा इसलिए हो जाता था क्योंकि वे योग और कलारिपट्टू विद्या में पारंगत थे।इसका मतलब यह कि कृष्ण अपनी देह को किसी भी प्रकार का बनाना जानते थे।इसीलिए स्त्रियों के समान दिखने वाला उनका कोमल शरीर युद्ध के समय अत्यंत ही कठोर दिखाई देने लगता था।उनके शरीर से मादक गंध निकलती रहती थी।उनकी त्वचा का रंग काला और ज्यादातर लोग श्याम रंग का मानते हैं।श्याम रंग अर्थात कुछ-कुछ काला और कुछ-कुछ नीला। मतलब काले जैसा नीला।जैसा सूर्यास्त के बाद जब दिन अस्त होने वाला रहता है तो आसमान का रंग काले जैसा नीला हो जाता है।
कलारिपट्टू विद्या में शत्रु पर हमले के दौरान पैर से मारना पूर्व निर्धारित तरीके से मल्लयुद्ध और उपचार के तरीके शामिल हैं।इसके क्षेत्रीय स्वरुप केरल की भौगोलिक स्थिति के अनुसार वर्गीकृत हैं।ये हैं मलयालियो की उत्तरी शैली तमिलों की दक्षिणी शैली और भीतरी केरल से केन्द्रीय शैली।उत्तरी कलारिपट्टू कठिन तकनीक के सिद्धांत पर आधारित है जबकि दक्षिणी शैली मुख्यतः नर्म तकनीकों का अनुसरण करती है।हालांकि दोनों प्रणालियां आंतरिक और बाह्य अवधारणाओं का उपयोग करतीं हैं।कलारिपट्टू के कुछ युद्ध अभ्यासों को नृत्य में प्रयोग किया जाता है और वो कथकली नर्तक जो युद्ध कला को जानते थे वे स्पष्ट रूप से अन्य कलाकारों की तुलना में बेहतर थे।कुछ पारंपरिक भारतीय नृत्य स्कूल अभी भी कलारिपट्टू को व्यायाम नियम के रूप में शामिल करते हैं।
मार्शल आर्ट से भी ज़्यादा घातक इस विद्या के जनक कृष्ण ही थे।उन्‍होंने इस विद्या का प्रयोग करके चाणूर और मुष्टिक जैसे मल्ल योद्धाओं का वध किया था।इसी विद्या के जरिए उन्‍होंने कालिया नाग का भी वध किया था।इसी विद्या से प्रशिक्षित होने के कारण कृष्‍ण की नारायणी सेना को सबसे भयंकर प्रहारक सेना माना जाता था।ये वही नारायणी सेना है जिन्‍हें महाभारत में कौरवों ने युद्ध में जीत पाने के ल‍िए कृष्ण से मांगा था।आज के युग में कलारिपट्टू केरल का एक मार्शल आर्ट है जोकि विश्व की सबसे पुरानी, लोकप्रिय व वैज्ञानिक कला है।कूंग-फूं का विकास भी इस कला के जरिए माना जाता है।

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