जानिए क्या है शिर्डी के साईं बाबा के मूर्ति की रोमांचक कथा

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साईं बाबा कोई मिथकीय शख्सियत नहीं थे। वो सशरीर इस धरती पर आए थे। आम लोगों के बीच रहे और इंसानियत का पाठ पढ़ाकर जैसे इस धरती पर आए थे, वैसे ही चले गए। लेकिन उनकी दी गई शिक्षा और उनका जीवन आज भी उनके भक्तों को राह दिखा रहा है।
साईं बाबा की महासमाधि के बाद साईं बाबा की पूजा साईं बाबा की फोटो के साथ की जाती थी जो की बुट्टी वाडा में रखी गयी थी
साईं बाबा की मूर्ति समाधी मंदिर में १९५४ तक नही स्थापित की गयी थी |

शिर्डी के साईं बाबा के पास दुनिया के हर कोनसे से उनके भक्त उनके दर्शन के लिए जाते है। लोग कहते है की बाब के पास किसी भी तरह का सिद्धी चमत्कार नहीं थी। मगर तो भी उनके केवल स्पर्श में ही कुछ अलग सकती थी। साईं के जन्म से लेकर उनके मृत्यु तक की हम कहानियां सुनते हैं। मगर आज साईं बाबा की जो कहानी आपको बता ने जा रहें है उसके बारे में आप मेसे शायद ही किसी को पता होगा। आज हम आपको साईं बाबा के मूर्ति की कहानी सुनाएंगे।

सन 1954 तक शिर्डी में बाबा की कोई मूर्ति नहीं थी। बाबा की पूजा केवल उनकी तस्वीर देखकर की जाती थी। मगर एक दिन अचानक से किसी ने इटली से मार्बल मुंबई के बांद्रा में भेजा बाबा की मूर्ति के लिए। मार्बल किसने भेजा था आज तक इस बात का खुलासा नहीं हुआ।

शिरडी संस्थान ने उसे निलामी में ख़रीदाओर फिर उनहोने इसे शिर्डी बाबा की मूरत बनाने के लिए काम में ले लिए बजाज वसंत तालीम को यह कार्य सोफा गया साईं बाबा की मूर्ति बनाने का बजाज वसंत तालीम ने साईं बाबा से विनती करी की साईं बाबा आपके आशीष से मैं आपकी छवि आप जेसी बना सखु .

साईं बाबा ने अपने इस कार्य में बजाज वसंत तालीम को स्टूडियो में दर्शन दे कर आशीष दिया साईं बाबा के आशीष से आज यह साईं बाबा के समाधी मंदिर की मूर्ति पुरे विश्व में विख्यात है

यह साईं बाबा की मूरत ५ फूट ५ इंच की है यह मूर्ति 7 ओक्टोम्बेर १९५४ को विजयदशमी में दिन समाधी मंदिर में लगायी गयी साईं बाबा की फिर से ध्यान एक बुजुर्ग की तरह रखा जाता है

साईं बाबा की सेवा एक जिन्दा बुजुर्ग साधू की तरह की जाती है |

हर दिन सुबह बाबा का स्नान होता है उन्हें फिर नाश्ता खाना दिया जाता है उन्हें सोने चांदी के आभूषण आरती के समय पहनाये जाते है एक दिन में ४ बार उनके कपडे बदले जाते है |

रात्रि में बाबा साईं को मच्छर नही काटे इसलिए मच्छरदानी लगायी जाती है पानी का गिलास रात्रि में बाबा के समीप रखा जाता है |

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