क्या है #GoodTouch और #BadTouch

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अक्सर हम #GoodTouch और #BadTouch के बारे में बाते करते है ,कुछ लोगो को मनना है ,की हमें बच्चो को इसकी knowlage देनी चाहिए। लेकिन कुछ लोग इसका विरोध करते है।
मेरा ऐसा लिखना (बोलना )अटपटा लग सकता है, लेकिन यह जरूरी है। शायद मेरे लिखने(बोलने ) से कुछ लोग अपने बच्चों को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाएं।शायद अपने बच्चों को हर किसी के हाथों में सौंपने से माता-पिता एक बार सोचने लगें।

ये कहानी एक सोसायटी की है ,दिल्ली की सोसायटी मई गुप्ता जी अपनी बीबी और एक बच्ची के साथ रहते थे।
बच्ची की उम्र ७साल की थी। बच्चे तो भगवान रूप होते है। और भगवन के रूप का तो खुद मे ही ,अलौकिक होता है।
गुप्ता जी के घर के सामने मिश्रा जी रहते थे। वो एक प्राइवेट कंपनी मे सीनियर पोस्ट पे थे।
उनके २ बच्चे थे। एक लड़का और एक लड़की। लड़का बीएससी १ ईयर मे था। और लड़की १० मे।
दोनों परिवारों मे खूब बनती थी। गुप्ता जी शनिवार और रविवार को अपनी बेटी को पड़ने के लिए मिश्रा जी के पास भेज देते थे।
क्यों की मिश्रा जी की शनिवार और रविवार छूटी होती थी।
न जाने क्यों गुप्ता जी बेटी हमेशा पड़ने जाने से मना करती ,लेकिन गुप्ता जी की बीबी उसे डाट कर पड़ने के लिए भेज देती।
किसी ने जानना नहीं चाहा क्यों वो चुलबली सी लड़की इतनी शांत रहने लगी।
धीरे धीरे उसका मन भी पढ़ाई से हटने लगा।
वो स्कूल मे भी चुपचाप रहने लगी। उसके रिजल्ट का भी अस्तर दिन पर दिन गिरता जा रहा था।
उसकी टीचर उसे इस कारण से उसे बहुत डाटती थी। बोलती थी।-
तुम्हारा पड़ने लिखने मे बिलकुल मन नहीं लग रहा है ,अपने मार्क्स देखे है। कितने काम हो गए है।
ऐसा क्यों हो रहा है।
अरे कुछ जवाब भी दो गी। या ऐसे ही कड़ी रहोगी।
लड़की ने कुछ जवाब नहीं दिया।
टीचर को और गुसा आ गया। उसने बोला अपने पेरेंट्स को बुला कर लाना।
दूसरे दिन उस के पेरेंट्स उसके साथ स्कूल गए।
टीचर ने कहा
आप बच्ची का पड़ने लिखने मे एकदम मन नहीं लगता। न किसी question का answer देती है ,न कुछ बोलती है।
इसके मार्क्स भी काम आने लगे है। आप उसकी पढ़ाई पर थोड़ा ध्यान दे।
घर आके गुप्ता जी ने अपनी बेटी को खूब डाटा। और अपनी बीबी से कहा आप इसे रोज शाम को मिश्रा जी के पास पढ़ने को भेजो।
एकदम गधी हो गई है।
लड़की रोते हुए ,नहीं मैं उनसे पढ़ने नहीं जाऊगी।
गुप्ता जी बोले –
कैसे नहीं जायेगी ,अगर कल से ये ना जाये तो इसे दो लगा के भेजना। गुप्तजी ने अपनी बीबी से कहा।
कुछ दिन बाद उस स्कूल मे उस पुरानी टीचर की जगह एक नई टीचर आई.
उसने जब उस लड़की को देखा तो उन्हें कुछ अटपटा सा लगा।
वो जब भी उस से बात करती तो वो बहुत डर कर जवाब देती।
एक बार टीचर ने उससे कुछ पूछा लेकिन वो लड़की कही और खोई हुई थी। जब टीचर उसके पास जाकर उसके कन्धे पर हाथ रखा। तो वो एक दम से डर गई औरकापने लगी।
टीचर को ये सब बड़ा अटपटा सा लगा।
उसने इस बारे मे प्रिंसिपल से बात की और कहा
सर मैं अपने क्लास की एक लड़की के बारे मे बात करना चाहती हूँ ।
प्रिंसिपल ने बोला हाँ बोलो।
सर मेरे क्लास मे ये लड़की है ,इसके मार्क्स हर बार काम आते जा रहे है ,ये स्कूल मे गुमसुम सी डरी हुई रहती है।
प्रिंसिपल ने कहा देखो हम किसी भी स्टूडेंट के पर्सनल मेटर पर कुछ नहीं कर सकते है।
टीचर ने कहा -लेकिन सर मुझे मामला कुछ और लगता है।
प्रिंसिपल ने बच्चे को कौंसलर के पास ले जाने की इजाजत दे दी।
टीचर लड़की को लेकर स्कूल के कौंसलर के पास गई।
जब कौंसलर ने लड़की से बात की तब लड़की ने जो बताया उसे सुन कर वहाँ खड़े सभी लोगो के पैरो तले ज़मीन निकल गई।
उसने बताया मेरे पापा मम्मी मुझे जबरजस्ती सामने वाले अंकल के घर पढ़ने को भेजते है ,
अंकल जब मुझे पढ़ाते है ,और मुझसे कोई गलती हो जाती है ,तो वो मुझे बहुत गंदे से छूटे है ,जिससे मुझे बहुत दर्द होता है।
और बोलते हैं ,अगर मैने किसी को बताया तो वो मेरे पापा मम्मी को भी मार देंगे।
जब मैं उनसे पढ़ने से मना करती हूँ ,तब मेरे पापा मम्मी मुझे डॉट कर उनसे पढ़ने को भेज देते है ,उन्हें लगता है मैं पढ़ने से जी चुरा रही हूँ।
प्रिंसिपल ने तुरंत लड़की के माता -पिता को स्कूल बुलाया। और उन्हें सारी बात बताई।
इसके बाद उन्होंने पुलिस को कॉल कर बुलाया और अपनी कम्प्लेन लिखाई।
पुलिस ने जब मिश्रा से पूछताछ की तो उन्होंने साफ मना कर दिया लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई से पूछा तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
आज एक टीचर की सूझ -बुझ से उस लड़की को बचा लिया गया।

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