गुमनाम हीरो

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ये कहानी है ,एक ऐसे नागरिक की जिसने सेना के कंधे से कन्धा मिला कर लडे। उनके इस अधम साहस के लिए सरकार ने उन्हें अशोक चक्र प्रदान किया। 

वो लहू नहीं वो पानी है ,जो देश के काम न आये। 

एक बच्चा जो हमेसा बड़ा होकर सेना मे जाना चाहता था, और सेना के साथ मिलकर दुश्मनो  को छक्के छुड़ाने का ख्वाब देखा करता था। इसी ख्वाब को देखता हुआ वो बड़ा होने लगा। लेकिन उसके नसीब मे सेना की वर्दी नहीं लिखी थी ,और वो एक ट्रक ड्राइवर बन गया। लेकिन किसमत का खेल तो देखिये ,एक ट्रक ड्राईवर होने के बाद भी वो सेना कीतरफ से लड़ा,और उसके इस कारनामे को देखते हुए ,सर्कार की तरफ से उसे अशोक चक्र से सम्मानित भी किया गया। 

चौक गए न आप ,ऐसे मैं भी चौक गया था।  जब मुझे इस बारे मे पता चला। रोंगटे खड़े कर देने वाली इस कहनी को पढ़  कर  दिल मे देश के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत और जाग जाती है ,और ऐसे हीरो को दिल से बार बार अभिवादन निकलता है। 

देश के फौजी हमारे लिए असली हीरो हैं, लेकिन कुछ ऐसे हीरो भी हैं जिन्हे लोगों ने भुला दिया और वो फौजी ना होते हुए भी फौजी की तरह देश के लिए लड़ें हैं।ऐसे ही एक वीर की गाथा है, ट्रक ड्राईवर कमल नयन की। 

तारीख थी 30 जनवरी और साल था 1965 . जब ट्रक ड्राइवर कमल नयन अपने ट्रक में 90 बोरियाँ गेहू की लेकर पंजाब से दिल्ली जा रहे थे। 
रास्ते मे सेना के जवानो ने उन्हें रोका और बोले –
जनाब भारत -पाकिस्तान में युद्ध शुरू हो गया है ,हमें आप के ट्रक के साथ आप की जरुरत है। 
कमल नयन को मानो ऐसा लगा जैसे उनका बचपन का सपना उनके सामने बाहें फैलाए खड़ा था। वो फ़ौजी तो नहीं बन सके लेकिन आज देश सेवा करने का उनका सपना सच होरहा था। 
उन्होंने इस मौके को गले लगने में देरी नहीं की। 
और बोले –
देश की सेवा का मौका तो बस किस्मत वालो  मिलता है साहब। 
अगर ऐसे मरा तो सिर्फ मेरे नाम के आगे स्वर्ग वासी लिखा जायेगा। और देश की सेवा करते मरा तो मेरे नाम के आगे शहीद लिखा जाये गा। 
साहब इस मौके का तो मुझे बचपन से इंतजार था। 
इतना बोलते ही कमल नयन जी ने गेहूँ की बोरियाँ ट्रक से निकल कर सड़क पर रख दी और ट्रक मे गोला बारूद लेकर सेना की मदद के लिए बॉर्डर की तरफ निकल पड़े। बॉर्डर पे पहुंच के वे सेना  का साथ देने मे लग गए। वो दिन मे केवल ३ से 4 घण्टे ही सोते थे। 
वो लड़ते -लड़ते पाकिस्तान के स्यालकोट सेक्टर में घुस गए थे। जब वो गोले बारूद को लेकर दुश्मनों के इलाके से गुजर रहे थे। तब मानो उनके सर पे माँ चंडी सवार हो गई हो ,दुश्मन से अपने ट्रक  बचते , ऐसे ट्रक चला रहे थे ,जैसे वो कोई आसान से हाईवे पे ट्रक चला रहे हो। जो भी पाकिस्तानी सैनिक उनके सामने आया उसे अपने ट्रक  कुचल दिया। जरुरत पड़ने पर उन्होंने खुद ही हथियार उठा लिए और पाकिस्तानी सेना टूट पड़े। 
उनके अदम साहस को देखते हुए सरकार उन्हें अशोक चक्र से नवाजा। 
अशोक चक्र युद्ध के अलावा  शौर्य, बहादुरी और बलिदान के लिए दिया जाता है, और एक सिविलियन इससे ज्यादा बहादुरी कैसे दिखा सकता है। 
लेकिन अपने देश का दुर्भाग्य तो देखिये ,ऐसा साहस दिखने वाले कमल नयन जी को अशोक चक्र दे कर सरकार ने उन्हें भुला दिया। 
उन्हें अशोक चक्र तो मिला लेकिन उसके साथ मिलने वाली सुविधाये उन्हें नहीं मिली। 
उन्हें 15 लाख रुपए नगद और 70 हजार रुपए सालाना देने की घोषणा हुई थी।  लेकिन आज 50 साल से ऊपर हो गये ,लेकिन आज भी वो इसके लिए सरकिरी ऑफिस  चकर लगा  रहे है। 

कमल नयन जी के रूप में हमारे सामने एक मिसाल है। जिनकी देश भगति ऐसी है जो देश के लिए बिना डरे दुसमन के घर मे घुश कर उनपे ट्रक भी चढ़ा दिया। 

penmyth की पूरी टीम सलाम करि है ,उनके साहस और उनके जज्बे को।

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